Chapter 5 मध्ययुगीन काव्या (आ) बाल लीला
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वाच्य on Hindi Grammar
"वाच्य" हिंदी
व्याकरण में क्रिया के अनुसार वाक्य को विभाजित करने का एक महत्वपूर्ण अंश है। वाच्य
वाक्य के कर्ता के प्रति या उसके कृत्य के अनुसार निर्धारित किया जाता है। इसमें तीन
प्रमुख वाच्य होते हैं:
1. प्रथम वाच्य (कर्तरी वाच्य): जब क्रिया का कर्ता
वाक्य में स्पष्ट रूप से उद्घाटन करता है, तो उसे प्रथम वाच्य कहा जाता है। उदाहरण के लिए: "राम ने खाना खाया।"
इसमें "राम" को कर्ता के रूप में प्रयोग किया गया है।
2. मध्य वाच्य (कर्म कर्ता वाच्य): जब क्रिया का कर्ता
स्पष्ट रूप से प्रकट नहीं होता है, तो उसे मध्य वाच्य
कहा जाता है। उदाहरण के लिए: "खाना खाया।" इसमें कोई कर्ता स्पष्ट नहीं है,
केवल क्रिया "खाना" है।
3. उत्तम वाच्य (भावना वाच्य): जब क्रिया का कर्ता
अभाव में होता है और वाक्य केवल भावनात्मक अर्थ को प्रकट करता है, तो उसे उत्तम वाच्य कहा जाता है। उदाहरण के लिए:
"मुझे खाना खाने का मन है।" इसमें कोई कर्ता स्पष्ट नहीं है, बस एक भावनात्मक अभिव्यक्ति है।
वाच्य का अध्ययन वाक्य के
रचना और अर्थ को समझने में महत्वपूर्ण होता है।